06.11.2025
कन्याकुमारी
का सूर्यास्त, रात्रि विश्राम देखकर हम सुबह होटल गोपीनिवास में नाश्ता करके निकलगए पद्मनाभपुरम पैलेस Padmanabhapuram Palace (भगवान विष्णु का शहर) के लिए, नागरकोइल होते हुए , जोकि
एक ऐतिहासिक कस्बा/गाँव, कन्याकुमारी जिले के कलकुलम गाँव में है जो थुकलाई के पास है। भौगोलिक दृष्टि से यह जगह कन्याकुमारी (तमिलनाडु) के अंदर है लेकिन इसका देखरेख
और प्रशासन केरल सरकार के अधीन है, किसी समय कन्याकुमारी केरल राज्य का हिस्सा था।
छोटी सी शांत जगह, बाहर खेल खिलौनों, दैनिक सामान, नारियलपानी आदि की दुकानें, एक
अलग तरह का छोटा नारियल उसका स्वादिस्ट पानी और मलाई एक गिलास में हमने लिया,
पीकर सुखद ताजगी महसूस हुई। अंदर घुसकर, विशाल पेड़ों की छाया, बाई तरफ से एंट्री
टिकट लिया। बाहर से एकदम साधारण बनावट। (फोटो नीचे देखें)।
यह एशिया का सबसे बड़ा लकड़ी का पैलेस है जिसमें 14 छोटे बड़े महल है जिसे 1601 ईस्वी में बनवाया गया था । कहते है कि यह स्थान त्रावणकोर (वेनाड) की लगभग 300 साल राजधानी रही थी। पूरा एक चलता फिरता नगर, राजसी शानों शौकत, चारों तरफ चहल पहल, घोड़ों की टपा टप कदमताल, तलवारों की खनकार, राजसी आदेशों की गूंज, भगवान के मंदिरों की घंटियाँ और गूँजती आरतियाँ। ऊपर, नीचे, किसी महल में शयन के इस्तेमाल के बेड, किसी में कुर्सी, झूलें, किसी में बर्तन, किसी में मुराल पेंटिंगस, किसी में मूर्तियाँ, लकड़ी की गजब नक्काशीयां, खूबसूरत लकड़ी का काम, सबसे ज्यादा आकर्षक राजा के वो लकड़ी के हाल (डाइनिंग हाल) जहाँ प्रजा के 2000 लोगों को एक साथ मुफ़्त खाना बनाने और खिलाने की व्यवस्था। इस जगह की ऊर्जा, वायुमंडल, एक अलग अनुभूति, एक अलग एहसास।(फोटो नीचे देखें) कुछ पुण्य कर्मों का फल हुये।
एक युग, एक अतीत, एक वैभव की सुहानी और सुखद याद दिलाता हुआ यह महल उस शान शौकत की कहानी कहता हुआ खामोश खड़ा है ।
यहाँ से चल दिए हम आजिमाला शिव मंदिर (Aazhimala Shiv Temple) के लिए जहाँ शिव जी गंगाधरेश्वर की विशालतम प्रतिमा में विराजमान है, समुद्र के किनारे ,गुफा के अंदर बना हुआ एक अद्भुत मंदिर (फोटो नीचे देखें)इसके
बाद लगभग चार बजे , हम आगये केरल के खूबसूरत कोवलम बीच पर अपने होटल – द निलाकांत बीच
रिज़ॉर्ट (kovalam), होटल से कुछ पहले राजेश ड्राइवर ने गाड़ी खड़ी कर दी और होटल के
रीसेप्शन पर फोन कर दिया, थोड़ी ही देर में दो सहायक आ गए और कुछ सीढ़ियाँ उतरकर
हमारे आगे आगे चल दिए। समुद्र के किनारे किनारे होटल बने हुये हैं। समुद्र और होटल
की एंट्री के बीच एक छोटी सी सड़क है। दूर तक फैला हुआ अथाह समुद्र, विदेशी सैलानी
नंगे पैर समुद्री रेत पर चलते हुए, छोटे बड़े जहाज आते जाते हुए , लहरों की करतल
ध्वनि। (विहंगम दृश्य का विडिओ)।
उसके पश्चात हमने दीप जलाकर दीप दान किया। प्रसाद लिया और गुड़ की खीर का एक टीन पैक्ड प्रसाद भी घर के लिए लिया। अंदर विभिन्न देवी देवताओं की कलाकृतियाँ हैं। बड़े गलियारे को पार करके हम बाहर की तरफ आ गए लेकिन निकासी से पहले अद्भुत भरनाट्यम नृत्य को सीखने वाली विद्यार्थियों ने अपने नृत्य से समाँ बांध दिया। कहते है कि नृत्य की शिक्षा पूरी होने के बाद पहली प्रस्तुति भगवान को अर्पित की जाती है। शाम के समय मुख्य बाहरी दरवाजे की छटा निराली है। (फोटो नीचे देखें)
दर्शन करके हम अपने होटल आ गए, रात्रि का खूबसूरत समंदर का नजारा, बीच की सड़क पर रात्रि में फिश मार्केट लग जाता हैं।सुबह सुबह समुद्री रेत पर पैदल चलना सुहाना लगता है, मछुआरों की एक पूरी टीम लगभग 15/20 जनों की जाल लेकर जाने की तैयारी करते हुये, हमारे दाई तरफ कोवलम का पुराना लाइटहाउस (Kovalam Old Lighthouse), यह खूबसूरत नीली और सफेद धारियों वाला टावर आज भी स्थित है। (फोटो नीचे देखें)
इस लाइट हाउस के पास, सुबह सुबह समन्दर का नजारा, ताजगी भरी तेज हवायें, किनारे किनारे चहलकदमी, चट्टानों पर बैठकर उछलती कूदती लहरों से बातचीत करना, समंदर की लहरों के साथ नहाना, यह नजारा अद्भुत हैं।
तैयार
होकर हम रेस्टोरेंट में ब्रेकफ़ास्ट के लिए आगए, स्वादिस्ट नाश्ते में साउथ इंडियन
के साथ साथ नॉर्थ इंडियन पूरी सब्जी, फ्रूट्स, जूस, लाजवाब , लजीज और बाहर समंदर का दिलकश नजारा और खुला नीला आसमान दोनों एक होते हुए , कोवलम बीच - मनभावन। (फोटो नीचे देखें)।
कोवलम
से सामान पैक करके हम निकल गए केरल के खूबसूरत एलेप्पी (Alleppey)
में रहने के लिये। हाउस बोट से फोन
आ गया कि आप खाने (लंच) में क्या खाएंगें। सफर में लंबे समय तक साउथ इंडियन खाने
के बाद हमने उन्हें दाल, सब्जी, भात, बनाने के लिए बोल दिया। राजेश ने लगभग 12 बजे
हमें एलेप्पी छोड़ दिया और सारा सामान हाउस बोट के हवाले कर दिया,
हमने राजेश का शुक्रिया किया। एलेप्पी का समुद्री सफर शुरू हो गया। :- 
थोड़ी दूर चलने के बाद लगा कि एक अलग दुनिया, एक समंदर के पानी से निकली हुई बेकवाटर की अलग कल्पना, बोट पर ही घर की सारी सुविधाएं, तीन बज गये थे और भूख भी लग रही थी, उन्होनें बोट पर डाइनिंग टेबल पर शानदार और लजीज नॉर्थ इंडियन गरमा गरम खाना लगा दिया, खाकर एक अलग तृप्ति। (फोटो नीचे देखें)।
लहरों के साथ चलते चलते अलग अलग बेहद हसीन नजारें, रमणीय स्थल, समंदर के बैक वाटर से बना शांत जलमार्गों पर चलता गाँव/शहर, आपको महसूस हो जाएगा कि यूँ ही इसे पूर्व का वेनिस नही कहा जाता है। अलग अलग तरह के हाउसबोट छोटे बड़े, ग्रुप के लिए अलग, तरह तरह की सुविधाओं से सम्पन्न, मिलनसार व्यवहार।
शाम को चाय के साथ बेहद करारी
पकोड़ियाँ फिजा को और रंगीन बनाते हुये थी। रात्रि में उन्होंने हाउसबोट को अपने घर
के बाहर खड़ा कर दिया ताकि वो रात्रि विश्राम अपने घर पर कर सके और हम हाउसबोट में,
चाँदनी रात के सन्नाटे में एक अलग अनुभव, एलेप्पी के नीरव और शांत समंदर के साथ ले
सके।
सुबह मंदिर की घंटियों और पक्षियों की चहचाहट ने सुबह का स्वागत किया। वापसी के सफर के नजारें भी मानलुभावने हैं। बीच में आपको स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया का वाटर स्पोर्ट्स सेंटर भी दिखाई देगा - यह प्रसिद्ध पुन्नामदा (Punnamada) बैकवाटर्स के पास स्थित है। यहाँ मुख्य रूप से कयाकिंग, कैनोइंग और रोइंग (नौकायन) जैसे वाटर स्पोर्ट्स के लिए एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर की प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाती है।
चलिए दोस्तों आपको फिर ले
चलूँगा बचपन, जवानी की कुछ जानी पहचानी, कुछ अनजानी , कुछ सुनसान गलियों में, मोहल्लों में, एक नए शहर, नए देहात, नए
कस्बे, नए गाँव, नए पर्यटन स्थल के साथ, यात्राओं के इस अनवरत सफर पर।


























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