सौन्दर्य की नदी नर्मदा - मेरी निगाहों से
न जाने क्यूँ मुझे काफी समय से यात्रा
वृतांत और वास्तविक संस्मरण बहुत अच्छे लगते हैं। संभवतः यह एकदम सच्चे होते हैं और
लिखने वाले ने इनको अपने दिल से जिया होता है चाहे दुख हो या सुख हो। इसी कड़ी में मुझे
अमृतलाल वेगड़ जी की किताब “सौन्दर्य की नदी नर्मदा” पढ़ने का मौका
मिला जो की एक बहुत बड़ी यात्रा जो उन्होनें नर्मदा नदी की परिक्रमा के रूप में पूरी
की। क्या क्या घटनायें रास्ते में , गाँवों में, रोजाना के जीवन में, भूख में, प्यास
में, दोस्तों के साथ में घटी हर पल हर लमहें का सजीव वर्णन है। पढ़ते पढ़ते आप यात्रा
में कब उनके साथ हो जाते है आपको पता भी नहीं चलेगा। किताब को और दिल के करीब लाते
है उनके द्वारा बनाए स्केच, जो किताब है। वेगड़ जी चित्रकला के अध्यापक रहे थे। आज की
यात्राएँ सुगम और सुरक्षित है, खाने पीने की कोई कमी नहीं हैं, लेकिन जो यात्रा उन्होंने
की जब अगले दिन के खाने का कोई ठिकाना नहीं, दुर्गम रास्ते, पैदल पहाड़ियों, जंगलों
का पार करना, डाकुओं से अपने को सुरक्षित रखना, शायद यही सचमुच यात्राएँ थी। वेगड़ जी
को नमन और प्रणाम।
