मुंबई का खूबसूरत मानसूनी हिल स्टेशन (कृष्णागिरी) Monsoon Hill Station of Mumbai
यूं
तो मुंबई के आस पास बहुत सारे हिल स्टेशन है और मुंबई में कुछ खूबसूरत किले भी हैं, अपनी बहन
और भांजे के पास रात्रि में राखी बँधवाकर और विश्राम कर, सुबह मैँ नाश्ता वगैरह
करके कैब बुक करके निकल पड़ा कृष्णागिरी की यात्रा के लिए, पवई से निकलकर थोड़ी देर
में कैब आरे फॉरेस्ट में चल पड़ी दोनों तरफ हरा भरा जंगल जिन्हें देखकर आप कह नहीं
सकते कि क्या आप मुंबई में सफर कर रहे है, हाँ पतली सड़क पर वाहनों की भीड़ , काले
पीले ऑटो को देखकर आप ज्यादा देर भ्रम में भी नहीं रह सकते,लेकिन दोनों तरफ की हरियाली अद्भुत हैं। टैक्सी ड्राइवर ने बताया कि ,पीछे, इस आरे फॉरेस्ट को बचाने के लिए
वहाँ के निवासियों ने काफी प्रोटेस्ट किया था। ईश्वर करे मुंबईवासियों की ऑक्सीजन
की यह नली इनके शरीर से ना हटाई जायें। (फोटो एवं विडिओ नीचे देखे)
ई बग्गी गुफाओं से लगभग 1 किलोमीटर पहले ही उतार देती है उसके बाद का सफर पैदल जंगल के बीच बनी हुई पक्की सड़क पर, थोड़ा घुमावदार थोड़ा चढ़ावदार, बंदरों, लंगूरों, सुरीले पक्षियों के बीच, ट्रैकिंग का अच्छा खासा जंगली अनुभव (फोटो नीचे देखें) दूसरे रहगुजरों के साथ और यहीं से आपको एक हिल स्टेशन की शुरुआत महसूस होगी।
घुमावदार दिलकश हल्की चढ़ाई का सफर (अगस्त 2026)इस पहाड़ी सफर की ट्रैकिंग का विडिओ
सीढ़ियाँ चढ़कर (फोटो नीचे देखे) टिकट खिड़की है और उसके पश्चात विस्व प्रसिद्ध कान्हेरी गुफ़ाएं – मुंबई का छुपा हुआ खजाना या लुप्त होती हुई धरोहर या प्राण वायु।
आपके दाहिनी तरफ कृष्णागिरी की चट्टानों पर
उकेरित गुफ़ाएं और बाईं तरफ एक हरियाला अद्भुत नजारा जो किसी भी हिल स्टेशन को
टक्कर कर देने के लिए सक्षम है। कहते हैं कि ज्वालामुखी के काले लावे से बनी
चट्टानों को काटकर निर्मित होने के कारण इस पहाड़ी का नाम कृष्णागिरी पड़ा।
इस भागती दौड़ती मुंबई के लिये प्रकृति से रूबरू होने का, अपने अतीत को ढूँढने का या अपने आप को ढूँढने के लिए महात्मा बुद्ध की व्याखानों का, उपदेश का, संदेश का , बहुत बड़ा मूक श्रोत - कान्हेरी की गुफ़ाएं। सदियों पुरानी सभ्यता, और उनके तौर तरीकों को उन निगाहों से देखना, समझना और महसूस करना बहुत अद्भुत है। प्रकृति के बीच पत्थरों को तराश के बनाया हुआ विश्वविद्यालय, एक सभ्यता, उनकी मूक और अंकित भाषा, उनके दर्शाये गये हाव भाव, कुछ कहते हुये और कुछ मौन रह कर भी आपको सोचने के लिए मजबूर करते हुये।
ऊपर
पहुँचने पर पहली गुफा के बाहर गार्ड ने बताया कि लगभग 110 गुफ़ाएं हैं और हर गुफा के बाहर एक पानी का कुंड
है जो भिक्षुओं की पानी की आवश्यकता के लिए पर्याप्त होता था । इन गुफाओं का निर्माण
प्रथम शताब्दी ईस्वी से ग्यारहवीं शताब्दी ईस्वी के मध्य हुआ था। गुफ़ाएं भगवान बुध
के हीनयान और महायान दोनो मतों का उल्लेख करती है। हीनयान यानि जहां बुद्ध
प्रतीकात्मक रूप में है जैसे स्तूप, बोधिवृक्ष, पदचिन्ह आदि। परन्तु बाद के काल की
महायान गुफाओं में बुद्ध को प्रतिमाओं के रूप में भिन्न भिन्न मुद्राओं में दिखाया
गया है।
गुफा संख्या 1 एवं 2 और बुध स्तूप (फोटो नीचे देखे)
गुफा संख्या 3 चैत्य हाल (फोटो नीचे देखे)
कहा जाता है दान दाताओं की मूर्तियाँ (ऊपर)
अद्भुत है इसके प्रवेश पर के बाद दोनों तरफ द्वारपाल है और फिर दोनों तरफ बुद्ध की विशाल गढ़ी हुई प्रतिमाएं जिनमे प्रतिमाओं के हाथ खुले और नीचे की ओर है शायद इशारा है कि जिंदगी एक खुली किताब है और मनुष्य को जमीनी हकीकत से जुड़े रहना चाहिए क्योंकि जीवन क्षणभंगुर है और अंतोतगत्वा यही मिट्टी हमारी परिणति है। इसके हाल में मैंने भी गार्ड के सिखाने और बताने पर ॐ का उच्चारण किया तो ध्वनि गुंजायमान थी, अद्भुत, लगता है यह स्थान किसी साधना, किसी आस्था से सिंचित है। लगता है कि प्राचीन काल में भी समाज का एक हिस्सा जो आध्यात्म, मानसिक शांति, ध्यान, एकाग्रता से जुड़ा होता था और वो लोग इस ज्ञान को आगे फैलाते थे मतलब भारत का समाज हर युग में शांति और सरलता को महत्व देता था ।तमाम
गुफाओं के लिए छोटी छोटी सीढ़ियों से बनाये गये उतार चढ़ाव वाले रास्ते और मध्य में
बहता हुआ जल श्रोत, दूर तक फैला हुआ सघन, निस्तब्ध हरा भरा वन क्षेत्र, झरनों की
कल कल, शिक्षा और दीक्षा एवं आश्रय तीनों के लिए माकूल स्थल।
गुफा संख्या 67
थोड़ी सी चढ़ाई थी और बारिश की वजह से रास्ते में हल्की सी फिसलन, गार्ड ने दूर से बताया की आराम से पकड़कर चढ़ जाइए, उधर से भी आप नीचे आ पाएंगे , देखा तो सामने गुफा नंबर 67 आ गई, बहुत सुंदर बुद्ध के चित्र अलग अलग मुद्राओं , अलग अलग दशाओं में, जीवन के विभिन्न रूपों को दर्शाते हुये :-
चारों तरफ गुफाओं का एक अंतहीन सिलसिला, ऊपर नीचे, दायें बाएं, एक पूरी संस्कृति, एक पूरा समाज, एक समय चलता फिरता ,चहल पहल से भरा हुआ, भिक्षुकों से भरा हुआ, शिक्षकों से भरा हुआ, रहने के लिए सारी व्यवस्थाओं से भरा हुआ, आज एक बिल्कुल निस्तब्ध पहाड़ी, शायद उन इशारों उन संदेशों को पढ़ने समझने में एक पूरा जमाना निकल जाये। हमारे पूर्वजों की एक अनमोल धरोहर, अमूल्य विरासत, अथक एवं अपार मेहनत या तपस्या जो उन्होनें झुलसती धूप, गरजती बरसातों में की थी इनको गढ़ने के लिए, जल संचयन की कारगर व्यवस्था बनाने के लिए, प्रकाश की समुचित व्यवस्था करने के लिए, एक रूप देने के लिए, अपनी मूक भाषा बोलते हुये आज भी खड़ी हैं उसी धूप और बरसातों से बेपरवाह, बताते हैं कि लकड़ी की कई नक्काशीयां, काफी सामान खराब हो चुका हैं। ये गुफ़ाएं जीते जागते एहसास का एक विलक्षण उदाहरण हैं जिसकों सँजोकर रखना अब हमारी जिम्मेदारी हैं।
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान, बोरिवली के जंगल का विहंगम दृश्य और सुदूर मुंबई की इमारतें













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Beautifully depicted. I live for three years in the society adjoining to the Park but never visited these caves. Your travelogue took ne to these caves as if I was myself visiting them.
ReplyDeleteThanks a lot Sir. During the rainy season in Mumbai, this is one of the most beautiful place to visit, green forest trekking, mesmerising Budha architecture and their teachings, full of life Hills, deep silence of the caves.
DeleteBhut he khubsurat jagah hai i love it neture and mountains 🤗🤗🏔️⛰️🌲🌺🏵️🌻 Surya Narayan from Sujangarh
ReplyDeleteबिल्कुल सही , बरसातों में तो बेहद खूबसूरत जगह है। प्रकृति का एक अद्भुत खजाना है। धन्यवाद सूर्य नारायण - एस के लोहिया
Deletecomments received on whats app from PNB Seniors - Shri Umesh Jain G - Very Nice, Shri B M Panda G - Nice, Shri Rakesh Grover Ji - Dear Lohiya Ji, what a detailed explanation, Bhai Brijesh Jain - Beautiful .....and what a depiction, Adesh Mohan Goyal Ji - Aapne Krishna giri ke bhi darshan kara diye, Rakesh Aggarwal Bhai saheb - Shaandar, Vijay Kuldeep Aggarwal Ji - Bahut Khub, P K Aggarwal Ji (Ghaziabad) - Great Sir, Ashok Aggarwal Ji (Meerut) - बहुत सुंदर विवरण है। यह हिल स्टेशन देखा नहीं है।
ReplyDeleteपी एन बी परिवार के सभी साथियों का दिल से शुक्रिया, आपके विचार और भावनाएं मेरा हौंसला बढ़ाते है, सफर का सिलसिला जारी रखेंगे, साभार - एस के लोहिया
Deleteबहुत सुंदर! ईसापूर्व तीसरी शताब्दी से बौद्ध भिक्खू गुफ़ाएँ इस्तेमाल करने लगे थे। महाराष्ट्र में आठ सौ से ज़्यादा गुफ़ाएँ हैं और ज्यादातर बौद्ध भिक्षुओं से जुड़ी हैं। मानसून की हरियाली में और सुंदर लगती हैं। - शुभकामनाओं के साथ- हर्ष वर्धन
ReplyDeleteधन्यवाद भाई साहब, आपने सही कहा है शायद वो दौर कुछ ऐसा ही था और बौद्ध धर्म काफी फैला हुआ था । जीवन का यह एक अलग आयाम है। आपको अच्छा लगा - साभार - एस के लोहिया
Deleteश्री खेमचंद साहब , गाज़ियाबाद (पी एन बी) से व्हाट्स एप पर लिखते है :- गलियारा 7 श्रृंखला में मुंबई का खुबसूरत मानसूनी हिल स्टेशन(कृष्णागिरी) का वर्णन जिस प्रभावी अंदाज में किया है वह आपके द्वारा दिए गए प्राकृतिक और बुद्ध चित्रों से स्वाभाविक स्वरूप में जीवंत परिलक्षित हो रहा है। मैने तो वास्तव इसके बारे में सुना ही नहीं था जबकि बंबई कई बार जाने का सौभाग्य मिला और महीने से ज्यादा रहा भी। भविष्य में जाने का मौका मिला तो अवश्य जाऊंगा।
ReplyDeleteखेमचंद वेव सिटी गाजियाबाद
धन्यवाद खेमचंद सर, आपको यात्रा वृतांत आकर्षक और जीवंत लगा यह बड़ी खुशी की बात है । यह मुंबई का एक अद्भुत खजाना है और बरसातों में तो एक खूबसूरत हिल स्टेशन बन जाता है, जीवन का एक अलग दर्शन और एक अलग अनुभूति। साभार - एस के लोहिया
Deleteबहुत सुंदर प्राकतिक दृश्य एवं नज़ारे, मुम्बई में सोचा नहीं था। अब जब भी मुम्बई जाएंगे तो यह भी आकर्षक जगह देखने को अवश्य जाएंगे।
ReplyDeleteलेखन एवं जानकारी के लिए धन्यवाद।
सुधीर निंद्राजोग, मेरठ।
जी हाँ, सुधीर जी, यह मुंबई की बोरिवली की भीड़ भाड़ वाली सड़क के बीच में , एक तरफ अनोखा जंगल है, एक पूरी सभ्यता और संस्कृति के साथ जिसे हमारें पूर्वजों ने बनाया था, सींचा था, बरसात में इसके दीदार बहुत हसीन है, आप किसी दिन सुबह का समय यहाँ बिताए, आपको बहुत अच्छा लगेगा। आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए उत्साह वर्धक है , धन्यवाद - एस के लोहिया
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